अविश्वास प्रस्ताव 18/07/2018

अविश्वास प्रस्ताव

मुद्दा :- नरेन्द्र मोदी सरकार (16 वी लोकसभा) के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव को विपक्ष द्वारा लाया गया जिसको लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया हैं जिस पर चर्चा होगी एवं सभी पार्टी ने व्हिप जारी कर उपस्थित रहने को कहा हैं |

  • संविधान के अनुच्छेद 75(3) में कहा गया है कि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी अतः इसका अभिप्राय है की मंत्रिपरिषद तभी तक है जब तक कि उसे सदन(लोकसभा) में बहुमत प्राप्त है, दूसरे शब्दों में लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव लाकर मंत्रिपरिषद को हटा सकती है
  • इसके आलावा सविधान में कही भी अविश्वास प्रस्ताव का उल्लेख नहीं किया गया है |
  • लोकसभा के नियम 198 के अंतर्गत अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है |
  • इसे केवल विपक्ष के सदस्य द्वारा लोकसभा में लाया जा सकता है, जिसके पक्ष में 50 सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना अनिवार्य है |
  • अविश्वास प्रस्ताव के लिए राष्ट्रपति की किसी भी प्रकार की सिफारिश की आवश्यकता नहीं होती है पास होने के बाद भी कोई मंजूरी की जरुरत नहीं होती है लेकिन मंत्रिपरिषद को अनिवार्य रूप से इस्तीफा देना पड़ता है | जिसके बाद नई लोकसभा का गठन चुनाव के द्वारा ही होता है |
  • अब तक यह सबसे ज्यादा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ 15 बार लाया गया था |
  • पहली बार जे बी कृपलानी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जो 1963 में पहली बार जवाहरलाल नेहरु की सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, एवं पहली बार अविश्वास प्रस्ताव पास होने से गिरने वाली सरकार मोरारजी देसाई की थी | यह अभी तक तीन बार पारित हो चुका है |
  • 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार गिरी, 1979 में चौधरी चरण सिंह की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है जिसमें उन्होंने इस्तीफा दे दिया, 1993 में नरसिंह राव की सरकार में लाया गया एवं 1997 में संयुक्त मोर्चा सरकार के विरुद्ध लाया गया तथा मार्च 1998 इंद्र कुमार गुजराल ने बहुमत खो दिया जिसकी वजह से उनकी सरकार गिर गयी |
  • 1999 में अटल बिहारी वाजपेई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिसमें अटल बिहारी वाजपेई 1 वोट से हार गए और उन्हें सरकार से इस्तीफा देना पड़ा 1996 में भी अटल बिहारी वाजपेई बहुमत ना  जुटा पाने के कारण 13 दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा था |
  • 2009 में अमेरिका के साथ परमाणु  दिल के मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव का सामना कांग्रेस सरकार को करना पड़ा जिसमें मनमोहन सिंह अपनी सरकार बचाने में सफल रहे |
  • यह व्यवस्था ब्रिटेन से ली गयी है जो दुनिया का पहला(1972) अविश्वास प्रस्ताव था, कनाडा जर्मनी इटली में अविश्वास प्रस्ताव की व्यवस्था है जिसमे जर्मनी में साथ में ही नये उम्मीदवार का भी नाम देना पड़ता है और इटली में दोनों सदनों में पास होना अनिवार्य है |
  • कभी भी अगर राष्ट्रपति को लगता है कि मंत्रिपरिषद पर विश्वास नहीं है लोकसभा का तो सरकार को विश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कह सकता है |

विश्वास प्रस्ताव

  • विश्वास प्रस्ताव सरकार की तरफ से लाया जाता है जिसमे मंत्रिपरिषद को अपना बहुमत साबित करना पड़ता है अर्थात इस प्रस्ताव का पास होना अनिवार्य होता है इसके पास न होने पर सरकार को अनिवार्य रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है ।
  • इसके बाद लोकसभा का विघटन हो जाता है और पुनः गठन के लिए पुनः चुनाव करना पड़ता हैं ।
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