नासा का "इनसाइड मार्स लेंडर" उपग्रह
- इनसाइड मार्स लेंडर मार्स पर नासा द्वारा भेजा गया हैं जिसका कार्य मार्स की आंतरिक गहरी संरचना का पता लगाना है |
- कैरी वोटिंग आर्म भेजे गए हैं रिवर टेक्नोलॉजिस्ट भेजे गए हैं
- सिस्मोमीटर भूकंप की तीव्रता की जांच करेगा, इस को बचाने के लिए एक थर्मल सील्ड लगी हैं |
- हीट फ्लो सतह के अंदर का ताप मापन करेगा जो सतह के में 5 मीटर अंदर जायेगा |
- इस यान को फिनिक्स अंतरिक्ष यान की तर्ज पर डिजाइन किया गया है |
- रेडियो विज्ञान यंत्र कोर की संरचना, बनावट एवं परिवर्तन को अध्ययन करेगा |
- यह इस तरह का विश्व का पहला यान हैं |
- सब कुछ सही रहा तो 26 नवंबर2018 को मंगल की सतह पर उतरेगा नासा का स्पेसक्राफ्ट |
- अंतरिक्ष यान को एटलस वी रॉकेट के जरिए कैलिफॉर्निया स्थित वंडेनबर्ग वायुसेना अड्डे से अंतरराष्ट्रीय समय शाम 4.35 बजे लॉन्च किया गया।
- यह परियोजना 99. 3 करोड़ डॉलर की है, जिसका लक्ष्य मंगल की आंतरिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी बढ़ाना है।
- लैंडर के मंगल की सतह पर उतरने के बाद एक ‘रोबॉटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर (भूकंपमापी उपकरण) लगाएगा। दूसरा मुख्य औजार एक ‘सेल्फ हैमरिंग’ जांच है जो ग्रह की सतह में उष्मा के प्रवाह की निगरानी करेगा। नासा ने कहा कि जांच के तहत सतह पर 10 से 16 फुट गहरा सुराख किया जाएगा। यह पिछले मंगल अभियानों से 15 गुना अधिक गहरा होगा।
- 2030 तक मंगल पर लोगों को भेजने की नासा की कोशिशों के लिए वहां का तापमान समझना महत्वपूर्ण है। सौर ऊर्जा और बैटरी से ऊर्जा पाने वाला लैंडर को 26 महीने संचालित होने के लिए डिजाइन किया गया है।