चाँद पर हीलियम-3 स्वच्छ ऊर्जा के श्रोत

चाँद पर हीलियम-3 स्वच्छ ऊर्जा के श्रोत

उद्देश्य:- चाँद पर उपस्थित अनेक महत्वपूर्ण तत्वों में से एक स्वच्छ ऊर्जा का श्रोत हीलियम-3 को पृथ्वी पर लाकर ऊर्जा की सारी जरुरत को पूरा करना |

  • चाँद पर क्या हैं इसके बारे में इतिहास में काफी समय से मानव ने  कल्पना  की हैं,  जैसे- TRUE HISTRY DECRYPTED में लेखक लूसियान ने राजा, सेना और बस्तियों की बात की साथ ही उन्होने पृथ्वी और चाँद के जीवन की तुलना भी की, तो वही इंग्लिश लेखक H.G WELLS ने THE FIRST MEN IN THE MOON में चाँद पर एलियन बताये और बैरेन मंचो सेन ने IN PROBLEM ADVENTURE में चाँद पर पेड़ पौधों का जिक्र  किया |
  • 20 जुलाई 1969 को चाँद पर पहला मानव (नील आर्मस्ट्रांग) अपोलो-11 यान से पहुचें | इसी के साथ लगातार 1969 से 1972 के बीच 12 अंतरिक्ष यात्री एवं कई मानवरहित मिशन भी चांद पर भेजे गए जो सतह से मिट्टी और पत्थर के कई नमूने लेकर पृथ्वी पर आए |
  • 1972 में अपोलो-17 मिशन के पृथ्वी पर वापस आने पर यह दावा किया गया कि चांद पर ऊर्जा का सबसे स्वच्छ स्रोत हीलियम-3 मौजूद है लेकिन यह पृथ्वी पर अत्यंत कम मात्रा में उपस्थित है |
  • नासा के मुताबिक चंद्रमा पर 10 लाख मीट्रिक टन हीलियम-3 मिल सकता है जिसको अगर पृथ्वी पर ले आया जाता है तो यह उर्जा का बहुत ही अच्छा स्रोत होगा |
  • इसरो 800 करोड़ की लागत के साथ हीलियम-3 की खोज के लिए उपग्रह एवं रोवर भेजने की तैयारी है (बाद में इन सारी खबरों का खंडन किया गया), फिर भी अगर भारत हीलियम की खोज कर लेता है, तो इसे पृथ्वी पर लाना एक बड़ा चुनौती भरा काम होगा | लेकिन इसरो चंद्रयान-2 चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहा है |

हीलियम-3 को धरती पर लाने से संबंधित कुछ चुनौतियां:-

  • चंद्रमा एवं धरती के वातावरण में बहुत असमानताएं हैं, जिसके कारण वैज्ञानिक अभी इस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं, कि चंद्रमा पर उपस्थित हीलियम-3 पृथ्वी पर लाने पर किस तरह का व्यवहार करेगा |
  • भारत के पास अभी इस तरह का कोई नाभिकीय रिएक्टर नहीं है, जिसमें हीलियम-3 का प्रयोग किया जा सके, अर्थात भारत को अभी हीलियम-3 को चंद्रमा से लाने एवं उपयोग करने के लिए एवं इस मिशन को मूर्त रुप देने के लिए काफी समय एवं अनुसंधान की आवश्यकता है |
  • अभी हीलियम-3 चंद्रमा से पृथ्वी तक लाने की लागतो के बारे में भी कोई अनुमान नहीं लगाया जा सका हैं, हो सकता है, यह लागत कम भी हो या अधिक भी हो सकती है |
  • भारत हीलियम-3 के चंद्रमा पर खोज एवं प्रमाण के बाद साथ ही पृथ्वी पर आयात के बाद भारत स्वच्छ ऊर्जा के स्रोत के लिए आत्मनिर्भर बन सकेगा, साथ ही भारत चाहता है, कि चंद्रमा पर हीलियम-3 की खोज एवं निष्कर्षण में भारत न सिर्फ भागीदार हो साथ ही नेतृत्व करता की भूमिका भी निभाए |

हीलियम-3 के बारे में:-

  • आमतौर पर हीलियम-3 गैसीय अवस्था में पाया जाने वाला एक रासायनिक तत्व है, जिसे निष्क्रिय एवं नोबल गैस के नाम जाता है, क्योंकि यह रंगहीन, गंधहीन स्वादहीन एवं नॉन टॉक्सिक होती है, हीलियम-3 का प्रयोग किसी भी ही वस्तु को ठंडा करने के लिए भी किया जाता है |
  • यह हीलियम का एक आइसोटोप भी है, जिसे सूर्य के द्वारा सौर्य पवनो से उत्पन्न होता है, लेकिन पृथ्वी पर उपस्थित चुंबकीय क्षेत्र इसे पृथ्वी पर पहुंचने से रोकते हैं, परंतु चंद्रमा पर चुंबकीय क्षेत्र ना होने के कारण यह लगातार चंद्रमा द्वारा अवशोषित किया जा रहा है, जिसके कारण चन्द्रमा पर इसकी अत्यधिक मात्रा मौजूद हैं |
  • इसके न्यूक्लियस में प्रोटॉन की संख्या समान होती है, लेकिन इसमें सामान्य से एक न्यूट्रॉन कम होता है, अर्थात इसके नाभिक में 2-प्रोटॉन और 1-न्यूट्रॉन होते हैं और इस कारण परमाणु द्रव्यमान 3 होता है, इसीलिए इसे हीलियम-3 कहा जाता है |
  • इसका सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि इसका प्रयोग परमाणु संलयन अभिक्रिया में होता है, जिससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा की उत्पत्ति हो सकती है |
  • हीलियम 3 को ड्यूटेरियम(भारी जल) या भारी हाइड्रोजन या किसी अन्य हीलियम-3 संलयन किया जाए, तो भारी मात्रा में ऊर्जा की उत्पत्ति करता है, साथ ही किसी भी प्रकार का नाभिकीय अपशिष्ट पदार्थ की उत्पत्ति नहीं करता जिससे ग्लोबल वार्मिंग या किसी अन्य प्रकार की पर्यावरणीय समस्या को उत्पन्न नहीं करता हैं |
Posted on by