धारा-377 अब अपराध मुक्त भाग-1

मुद्दा:- सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराधमुक्त घोषित किया

स्रोत:- भारत सरकार का राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ एवं अन्य समाचार पत्र( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया इत्यादि )

  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायाधीशीय संवैधानिक खंडपीठ ने चार अलग-अलग लेकिन समेकित निर्णयों में आपसी सहमति से दो समान लिंग वाले व्यक्तियों के बीच बनने वाले यौन संबंधों को वैध घोषित किया। 
  • इसने 2013 के फैसले को संवैधानिक रूप से अस्वीकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय समलैंगिकता को अपराध मानने को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। 
  • पाँच न्यायाधीशीय खंडपीठ की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने की और इसमें जस्टिस आर.एफ. नरीमन, ए.एम. खानविलकर, डी.वाई. चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा शामिल थे।
  • यह फैसला नर्तक जौहर, पत्रकार सुनील मेहरा, शेफ रितु डालमिया, होटल उद्यमी अमन नाथ और केशव सूरी तथा बिज़नेस एक्जीक्यूटिव आयशा कपूर द्वारा दायर की गई पाँच याचिकाओं के संबंध में दिया गया । 
  • इस वर्ष की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई चार दिवसीय सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा था कि वह याचिकाओं का प्रतिरोध नहीं करेगा और फैसले को "न्यायालय की बुद्धिमत्ता" पर छोड़ देगा। 

यह धारा-377 खंड का पहला भाग हैं इसी क्रम मे अन्य भाग लगातार आगे ............. 

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