मुद्दा:- सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराधमुक्त घोषित किया
स्रोत:- भारत सरकार का राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ एवं अन्य समाचार पत्र( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया इत्यादि )
धारा 377-
- भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 का संबंध अप्राकृतिक शारीरिक संबंधों से है। इसके अनुसार यदि दो लोग आपसी सहमति अथवा असहमति से आपस में अप्राकृतिक संबंध बनाते हैं तो वह दोषी करार दिये जाते हैं एवं उनको 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है।
- अधिनियम में इस अपराध को संज्ञेय तथा गैर-जमानती अपराध माना गया है।
- यद्यपि व्यक्ति के चयन की स्वतंत्रता को महत्त्व देते हुए 2009 में हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से एकांत में बनाए जाने वाले समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर करने का निर्णय दिया था। किंतु 2013 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समलैंगिकता की स्थिति में उम्रकैद के प्रावधान को पुनः बहाल करने का फैसला दिया गया।
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LGBT (Lesbian, Gay, Bisexual and Transgender) का मुद्दा
सरकार का संविधान पीठ के सामने रखे गये तथ्य:-
- सरकार ने संविधान पीठ से समलैंगिकों के बीच विवाह, गोद लेने और एलजीबीटी समुदाय के अन्य नागरिक अधिकारों पर गौर न करने का आग्रह किया है।
यह धारा-377 खंड का दूसरा भाग हैं इसी क्रम मे अन्य भाग लगातार आगे .............