मुद्दा:- सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराधमुक्त घोषित किया
स्रोत:- भारत सरकार का राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ एवं अन्य समाचार पत्र( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया इत्यादि )
धारा 377-
LGBT (Lesbian, Gay, Bisexual and Transgender) का मुद्दा
सरकार का संविधान पीठ के सामने रखे गये तथ्य:-
- सरकार ने संविधान पीठ से समलैंगिकों के बीच विवाह, गोद लेने और एलजीबीटी समुदाय के अन्य नागरिक अधिकारों पर गौर न करने का आग्रह किया है।
संविधान पीठ द्वारा दिए गये कुछ तथ्य:-
- संविधान पीठ ने कहा कि अगर वह समलैंगिक वयस्कों द्वारा सहमति से बनाए गए संबंध को संवैधानिक करार देती है तो एलजीबीटी समुदाय में शादी, रोजगार और चुनाव लड़ने आदि से संबंधित अयोग्यता का मामला उठेगा।
- पीठ ने कहा कि धारा-377 को असंवैधानिक करार देने के बाद एलजीबीटी समुदाय में शादी आदि सामाजिक दृष्टि से अमान्य नहीं रह जाएगी।
- पीठ ने तुषार मेहता से कहा कि हम सिर्फ सेक्सुअल एक्ट का परीक्षण नहीं कर रहे हैं। हम यह परीक्षण भी कर रहे हैं कि दो वयस्कों के बीच संबंध संविधान के अनुच्छेद-21(जीने का अधिकार) का हिस्सा है या नहीं?
- पीठ ने कहा, हम नहीं चाहते हैं कि ऐसी स्थिति आए जब मैरिन ड्राइव पर घूम रहे दो समलैंगिकों को पुलिस परेशान करे और उन पर कानून के तहत मुकदमा दर्ज करे। पीठ ने कहा कि हम एलजीबीटी तक ही खुद को सीमित नहीं कर रहे।
- वास्तव में यह दो वयस्कों द्वारा सहमति से संबंध बनाने का मसला है। यह समझने की ज़रूरत है कि संविधान के तहत संबंध को संरक्षण प्राप्त है।
- याचिकाकर्त्ताओं के वकीलों का कहना था कि मूल बात एलजीबीटी समुदाय की स्वतंत्रता, समानता और सम्मान की है। गे समुदाय के लोगों को न सिर्फ न्याय नहीं मिल रहा है बल्कि उन्हें प्रताड़ित भी किया जा रहा है। उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह महज धारा-377 का मसला नहीं है बल्कि संवैधानिक मूल्यों का है।
यह धारा-377 खंड का तीसरा भाग हैं इसी क्रम मे अन्य भाग लगातार आगे .............