मुद्दा:- सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराधमुक्त घोषित किया
स्रोत:- भारत सरकार का राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ एवं अन्य समाचार पत्र( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया इत्यादि )
धारा 377-
LGBT (Lesbian, Gay, Bisexual and Transgender)
- समलैंगिकता का अर्थ किसी व्यक्ति का समान लिंग के लोगों के प्रति यौन और रोमांसपूर्वक रूप से आकर्षित होना है।
- वे पुरुष, जो अन्य पुरुषों के प्रति आकर्षित होते है उन्हें "पुरुष समलिंगी" या गे और जो महिला किसी अन्य महिला के प्रति आकर्षित होती है उसे भी गे कहा जा सकता है। लेकिन उसे आमतौर पर "महिला समलिंगी" या लैस्बियन कहा जाता है।
- जो लोग महिला और पुरुष दोनो के प्रति आकर्षित होते हैं उन्हें उभयलिंगी कहा जाता है। कुल मिलाकर समलैंगिक, उभयलैंगिक और लिंगपरिवर्तित लोगो को मिलाकर एल जी बी टी (LGBT) समुदाय बनता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे लिंग को मान्यता तो दे दी, पर अक़्सर लोगों को ये साफ नहीं होता कि खुद को L, G, B, T, I, Q कहने वाले लोग कौन हैं और कैसे एक दूसरे से फ़र्क हैं। कुछ प्रमुख अंतर देखते हैं जो निम्न प्रकार से है -
L (Lesbian लेस्बियन):-
- L – ‘लेस्बियन’: जब एक औरत को एक और औरत से ही प्यार हो तो उन्हें ‘लेस्बियन’ कहते हैं।
- आम तौर पर माना जाता है कि किन्हीं दो ‘लेस्बियन’ पार्टनर्स में एक का व्यक्तित्व आदमी जैसा होगा जिसे ‘बुच’ कहा जाता है। वो पैंट-शर्ट पहनती होगी और छोटे बाल रखना पसंद करेंगी।
- दूसरी पार्टनर की शख़्सियत औरत जैसी होगी जिसे ‘फेम’ कहा जाता है। वो स्कर्ट-सूट-साड़ी पहनती होगी और लंबे बाल रखना पसंद करेंगी, पर ये पुरानी सोच है, किन्हीं दो ‘लेस्बियन’ पार्टनर्स में कैसी भी शख़्सियत हो सकती है, एक को आदमी जैसी और एक का औरत जैसी होना ज़रूरी नहीं है।
यह धारा-377 खंड का पाँचवा भाग हैं इसी क्रम मे अन्य भाग लगातार आगे .............