धारा-377 अब अपराध मुक्त भाग-6

मुद्दा:- सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराधमुक्त घोषित किया

स्रोत:- भारत सरकार का राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ एवं अन्य समाचार पत्र( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया इत्यादि )

धारा 377-

G(Gay गे):-

  • G - ‘गे’: जब एक आदमी को एक और आदमी से ही प्यार हो तो उन्हें ‘गे’ कहते हैं।
  • वैसे ‘गे’ शब्द का इस्तेमाल कई बार सभी समलैंगिकों यानी पूरे समुदाय, जिसमें ‘लेस्बियन’, ‘गे’, ‘बाइसेक्सुअल’ सभी शामिल हैं, के लिए भी किया जाता है।

B (Bisexual बाईसेक्सुअल):-

  • B – ‘बाईसेक्सुअल’: जब किसी मर्द या औरत को मर्द और औरत दोनों से ही प्यार हो तो उन्हें ‘बाईसेक्सुअल’ कहते हैं।
  • यानी एक मर्द ‘बाईसेक्सुअल’ हो सकता है और एक औरत भी। दरअसल एक इंसान की शारीरिक चाहत तय करती है कि वो L, G, B है। वहीं एक व्यक्ति का शरीर, यानी उनके जननांग तय करते हैं कि वो T, I, Q है।

T (Transgender ट्रांसजेंडर):-

  • T – ‘ट्रांसजेंडर’: वो इंसान जिनका शरीर पैदा होने के व़क्त कुछ और था और जब वो बड़े होकर खुद को समझे तो एकदम उलट महसूस करने लगे। मसलन, पैदा होने के वक्त बच्चे के निजी अंग पुरुषों के थे और उसे लड़का माना गया, पर समय के साथ उसने खुद को समझा और पाया कि वो तो लड़की जैसा महसूस करते हैं, यानी वो ‘ट्रांसजेंडर’ हैं। उसी तरह से पैदा होने के वक्त बच्चे के निजी अंग औरतों के थे और उसे लड़की माना गया। पर समय के साथ जब उसने खुद को समझा और पाया कि वो तो लड़का जैसा महसूस करते हैं, तो वो ‘ट्रांसजेंडर’ हैं।

कुछ अन्य तथ्य:-

I (Inter Sex इंटर-सेक्स):-

  • I – ‘इंटर-सेक्स’ पैदाइश के वक्त जिस व्यक्ति के निजी अंगों से ये साफ़ नहीं होता कि वो पुरुष हैं या औरत, उन्हें ‘इंटर-सेक्स’ कहते हैं।
  • डॉक्टर को उस वक्त जो सही लगता है उस बच्चे को उसी लिंग का मान लिया जाता है और वैसे ही बड़ा किया जाता है।
  • बड़े होने के बाद जब उस इंसान को समझ में आ जाए कि वो कैसा महसूस करता है, वो खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’, कुछ भी मान सकता है।

Q (क्वीयर):-

  • Q – ‘क्वीयर’ जो इंसान ना अपनी पहचान तय कर पाए हैं ना ही शारीरिक चाहत, यानी जो ना खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’ मानते हैं और ना ही ‘लेस्बियन’, ‘गे’ या ‘बाईसेक्सुअल’, उन्हें ‘क्वीयर’ कहते हैं।
  • ‘क्वीयर’ के ‘Q’ को ‘क्वेश्चनिंग’ भी समझा जाता है यानी वो जिनके मन में अपनी पहचान और शारीरिक चाहत पर अभी भी बहुत सवाल हैं।

नोट:- सुप्रीम कोर्ट के LGBT (Lesbian, Gay, Bisexual and Transgender) पर दिए गये इस निर्णय के बाद इस समुदाय के किन्ही दो वयस्क व्यक्तियों के द्वारा आपसी सहमती के साथ गुप्त स्थान पर बनाये गए किसी भी प्रकार के संबध (शारीरिक या मानसिक) को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जायेगा एवं उसे इसके आधार पर किसी भी प्रकार की सजा नहीं दी जा सकती है |

यह धारा-377 खंड का अंतिम भाग हैं |

धन्यवाद....

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