संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और भारत का चयन

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और भारत का चयन

स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, जनसत्ता इत्यादि )

मुद्दा:- हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय के लिये भारत को नियम से हट कर एक बार फिर से चुना गया है।

  • गौरतलब है कि इस निकाय के लिये भारत का कार्यकाल तीन वर्षों का होगा, जो 1 जनवरी, 2019 से प्रारंभ होकर तीन साल तक चलेगा ।
  • भारत का अंतिम कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 में समाप्त हुआ था, नियमानुसार भारत तत्काल मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुने जाने के लिए पात्र नहीं था, क्योंकि वह पहले भी दो बार सदस्य रह चुका है |
  • सभी उम्मीदवारों के बीच सबसे अधिक मतों के साथ भारत को एशिया-प्रशांत श्रेणी में 188 मत मिले हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र की 193 सदस्यीय महासभा ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के नए सदस्यों के लिये चुनाव किया। 18 नए सदस्य गुप्त मतदान के द्वारा पूर्ण बहुमत से चुने गए।
  • परिषद में चुने जाने के लिये किसी भी देश को कम-से-कम 97 मतों की आवश्यकता होती है।
  • एशिया-प्रशांत (पसिफिक) श्रेणी में भारत को 188 मत, फिजी को 187 मत, बांग्लादेश को 178 मत, बहरीन और फिलीपींस प्रत्येक को 165 मत प्राप्त हुए।
  • भारत पहली बार एक वर्ष हेतु इस संस्था के लिए साल 2006 में चुना गया था।
  • इसके बाद 2007, 2011 और फिर 2014 में भारत को 3 वर्ष के लिए चुना गया।
  • यूएनएचआरसी, यूएन की मानवाधिकार संस्था है जिसका मिशन दुनिया भर में मानवाधिकारों की हिफाजत करना है, जिसकी स्थापना 15 मार्च 2006 को हुई थी।
  • इससे पहले यूएन कमीशन ऑन ह्यूमन राइट्स यानी यूएनसीएचआर अपना काम कर रहा था।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में 47 सदस्यों का चुनाव होता है जिन्हें 3 वर्ष के लिए सदस्यता मिलती है। चुनाव के लिए संयुक्त राष्ट्र आम सभा के 193 सदस्य गोपनीय रूप से मतदान करते हैं।
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र से मानवाधिकार परिषद में कुल पांच सीटें हैं, जिनके लिए भारत के अलावा बहरीन, बांग्लादेश, फिजी और फिलीपीन ने अपना नामांकन भरा था, 5 सीटों के लिए 5 ही दावेदारों के होने से सभी का निर्विरोध निर्वाचन पहले से ही तय था |
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