'इलाहबाद' शहर के नाम का इतिहास एवं नया नामकरण

“इलाहबाद” शहर के नाम का इतिहास एवं नया नामकरण

स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ संबन्धित संस्था की मुख्य वेबसाइट एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, जनसत्ता इत्यादि )

मुद्दा:- 16 अक्टूबर, 2018 को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने इस नाम परिवर्तन को मंज़ूरी देकर उत्तर प्रदेश के इलाहबाद का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से प्रयागराज कर दिया गया है |

  • उत्तर प्रदेश के इलाहबाद का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से प्रयागराज कर दिया गया है |
  • 16 अक्टूबर, 2018 को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने इस नाम परिवर्तन को मंज़ूरी प्रदान कर दी हैं।
  • इलाहबाद का नाम 16वीं शताब्दी में अकबर ने रखा था।
  • इससे पहले इलाहबाद को प्रयाग के नाम से जाना जाता है।
  • दो नदियों के संगम को प्रयाग कहा जाता है, इलाहबाद ने तीन नदियों गंगा, यमुना तथा सरस्वती नदी का संगम होता है, इसलिए इसे प्रयागराज नाम दिया गया है। अब यह नाम परिवर्तन का प्रस्ताव मंज़ूरी के लिए केंद्र सरकार के पास जायेगा।

इतिहास/पृष्टभूमि:-

  • इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश के बड़े जनपदों में से एक है।
  • यह गंगा, यमुना तथा गुप्त सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है। संगम स्थल को त्रिवेणी कहा जाता है एवं यह हिन्दुओं के लिए विशेषकर पवित्र स्थल है। प्रयाग (वर्तमान में इलाहाबाद) में आर्यों की प्रारंभिक बस्तियां स्थापित हुई थी।
  • इलाहाबाद, अपने गौरवशाली अतीत एवं वर्तमान के साथ भारत के ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरों में से एक है। यह हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन एवं ईसाई समुदायों की मिश्रित संस्कृति का शहर है।
  • ऐसी मान्यता हैं कि- “प्रयागस्य पवेशाद्वै पापं नश्यति: तत्क्षणात्।” — प्रयाग में प्रवेश मात्र से ही समस्त पाप कर्म का नाश हो जाता है । 
  • हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के प्र और याग अर्थात यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना और उस स्थान का नाम प्रयाग पड़ा जहाँ भगवान श्री ब्रम्हा जी ने सृष्टि का सबसे पहला यज्ञ सम्पन्न किया था।
  • इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहाँ माधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहाँ बारह स्वरूप विध्यमान हैं। जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है।
  • सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं।
  • हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है।
  • प्रयाग सोम, वरूण तथा प्रजापति की जन्मस्थली है। प्रयाग का वर्णन वैदिक तथा बौद्ध शास्त्रों के पौराणिक पात्रों के सन्दर्भ में भी रहा है। यह महान ऋषि भारद्वाज, ऋषि दुर्वासा तथा ऋषि पन्ना की ज्ञानस्थली थी। ऋषि भारद्वाज यहां लगभग 5000 ई०पू० में निवास करते हुए 10000 से अधिक शिष्यों को पढ़ाया। वह प्राचीन विश्व के महान दार्शनिक थें।
  • 1575 ई० में  संगम के सामरिक महत्व से प्रभावित होकर सम्राट अकबर ने “इलाहाबास” (वर्तमान में इलाहाबाद) के नाम से शहर की स्थापना की जिसका अर्थ “अल्लाह का शहर” है। मध्ययुगीन भारत में शहर का सम्मान भारत के धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर था। एक लंबे समय के लिए यह मुगलों की प्रांतीय राजधानी थी जिसे बाद में मराठाओं द्वारा कब्जा कर लिया गया था।
  • 1801 ई० में शहर का ब्रिटिश इतिहास इस वर्ष शुरू हुआ जब अवध के नवाब ने इसे ब्रिटिश शासन को सौंप दिया। ब्रिटिश सेना ने अपने सैन्य उद्देश्यों के लिए किले का इस्तेमाल किया।
  • 1857 ई० में यह शहर आजादी के युद्ध का केंद्र था और बाद में अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की गढ़ बन गया।
  • 1858 ई० में आजादी के प्रथम संग्राम 1857 के पश्चात ईस्ट इंडिया कंपनी ने मिंटो पार्क में आधिकारिक तौर पर भारत को ब्रिटिश सरकार को सौंप दिया था। इसके बाद शहर का नाम इलाहाबाद रखा गया तथा इसे आगरा-अवध संयुक्त प्रांत की राजधानी बना दिया गया।
  • 1868 ई० में इलाहाबाद न्याय का गढ़ बना जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना हुई।
  • 1871 ई० में ब्रिटिश वास्तुकार सर विलियम ईमरसन ने कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल डिजाइन करने से तीस साल पहले आल सैंट कैथेड्रल के रूप में एक भव्य स्मारक की स्थापना की।
  • 1887 ई० में इलाहाबाद विश्वविद्यालय चौथा सबसे पुराना विश्वविद्यालय था। इलाहाबाद भारतीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संश्लेषण में बने कई विक्टोरियन और जॉर्जियाई भवनों में समृद्ध रहा है।
  • सभ्यता के प्राम्भ से ही इलाहाबाद विद्या, ज्ञान और लेखन का गढ़ रहा है। यह भारत का सबसे जीवंत राजनीतिक तथा आध्यात्मिक रूप से जागरूक शहर है।

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