समसामयिक घटनाक्रम-
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी43) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 31 उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
पीएसएलवी(PSLV) के बारे में-
- ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन (पीएसएलवी), विश्व के सर्वाधिक विश्वसनीय प्रमोचन वाहनों में से एक है।
- यह गत 20 वर्षो से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
- पीएसएलवी-D1 जिसको सितंबर-1993 भेजा गया गया था एवं पीएसएलवी-C39 जिसे अगस्त-2017 को भेजा गया था सफल नहीं हो सके हैं ।
- इसके अलावा भेजे गए कुल 43 मिशन पूरी तरह से सफल रहे हैं ।
- इस प्रमोचन वाहन से कुल 45 मिशन(नवंबर-2018 तक) किए गए हैं,जिसमे केवल 2 असफल रहे हैं ।
जीएसएलवी एमके-III के बारे में-
- जीएसएलवी एमके-III इसरो द्वारा विकसित किया जा रहा उच्च प्रमोचन क्षमता का प्रमोचक है ।
- इसके द्वारा भारत 4 टन श्रेणी के भू-तुल्यकाली उपग्रहों को कक्षा में भेज पाएगा तथा उपग्रह प्रक्षेपण के मामले में पूर्णत: आत्मनिर्भर हो जाएगा ।
- जीएसएलवी एमके-III में जीएसएलवी की तुलना में अधिक क्षमता वाला भारत में बना क्रायोजनिक चरण लगा होगा ।
- जीएसएलवी एमके-III की पहली परीक्षण उड़ान, एलवीएम 3 - एक्स/सीएआरई मिशन ने श्रीहरिकोटा से दिसम्बर 18, 2014 को उड़ान भरी तथा उड़ान के वायुमंडलीय चरण का सफल परीक्षण किया ।
तकनीकी विवरण-
- भू-स्थिर अंतरण कक्षा के लिए नीतभार(पेलोड) 4,000 कि.ग्रा.
- एल.वी.एम.-3 4 टन श्रेणी के जीसैट उपग्रहों को भू-स्थिर अंतरण कक्षा में भेजने में सक्षम होगा।
- निम्न पृथ्वी कक्षा के लिए नीतभार(पेलोड) 8,000 कि.ग्रा.
- एल.वी.एम.3 का शक्तिशाली क्रायोजनिक चरण भारी नीतभारों को 600 कि.मी. ऊँचाई पर स्थापित करने में सक्षम होगा ।
- क्रायोजनिक ऊपरी चरण : सी-25
- सी.ई.20 द्वारा शक्तिपोषित सी-25 भारत का सबसे बड़ा क्रायोजनिक इंजन है ।
स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ संबन्धित संस्था की मुख्य वेबसाइट एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, जनसत्ता इत्यादि ) |
नोट:- इस जानकारी का उपयोग केवल शिक्षण कार्य एवं जानकारी के लिए किया जा रहा हैं |