अधिकृत 10 एजेंसियां जो फोन और कंप्यूटर डाटा की जांच कर सकेंगी
चर्चा का कारण-
- सरकार ने 10 जांच एजेन्सियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में किसी भी व्यक्ति के टेलीफोन और कंप्यूटर डाटा की जांच के लिए अधिकृत किया है ।
मुख्य बिन्दु-
फैसले के पक्ष में तर्क-
- राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की जांच मे सहूलियत;
- नक्शलवाद, मावो वाद एवं आतंकवादी गतिविधियो पर नजर रखी जा सकेगी ।
- हिंसा विरोधी एवं अन्य दंगो या घटनाओ की तीव्र जांच की जा सकेगी ।
विपक्ष मे तर्क या नैतिक मुद्दे-
- किसी भी व्यक्ति के डाटा की जांच करना गैर कानूनी;
- व्यक्ति के मूल अधिकार अनुछेद-21 का उल्लाघन (सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार निजता व्यक्ति का मूल अधिकार हैं)
- व्यक्ति के नैसर्गिक अधिकारो का हनन ।
सरकार का पक्ष-
- सरकार ने इस पर संसद में और बाहर भी स्थिति स्पष्ट की हैं कि आदेश से संबंधित अधिसूचना में जांच एजेन्सियों को कोई नया अधिकार नहीं दिया गया है और गृह मंत्रालय ने जांच की अनुमति देने का अधिकार अपने पास ही रखा है ।
- वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राज्यसभा में कहा कि यह आदेश हर व्यक्ति और हर कंप्यूटर के लिए नहीं है बल्कि केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों में ही लागू होगा ।
- यह आदेश वर्ष 2009 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय में बनाये गये कानून पर ही आधारित है और इसे फिर से लागू किया गया है ।
निम्नलिखित 10 कंपनियां कंप्यूटर या मोबाइल डेटा की जांच कर सकती हैं-
- इंटेलिजेंस ब्यूरो
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
- प्रवर्तन निदेशालय
- सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज
- डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस
- सीबीआई
- एनआईए
- कैबिनेट सचिवालय (रॉ)
- डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस
- दिल्ली पुलिस कमिश्नर।
यह 10 कंपनीय निम्नलिखित कार्य कर सकेंगी-
- डेटा की जांच, फ़ोन टैपिंग कर सकेंगे
- पहली बार कंप्यूटर डेटा की जांच का अधिकार
- किसी भी कंप्यूटर के डेटा की जांच कर सकेंगे
स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ संबन्धित संस्था की मुख्य वेबसाइट एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, जनसत्ता इत्यादि ) |
नोट:- इस जानकारी का उपयोग केवल शिक्षण कार्य एवं जानकारी के लिए किया जा रहा हैं |