सरोगेसी बिल-2018 भाग-1

सरोगेसी बिल-2018

चर्चा का कारण-

  • भारत में सरोगेसी से उभरने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरोगेसी (नियामक) विधेयक लोकसभा में लाया गया जो 19 दिसंबर 2018 को पारित हो गया हैं ।

मुख्य बिन्दु-

  • भारत में सरोगेसी से उभरने वाली समस्याओं से निपटने के लिए यह विधेयक लाया गया है ।
  • यह विधेयक व्यावसायिक सरोगेसी और इससे जुड़े अनैतिक कार्यों पर रोक लगाएगा ।
  • विधेयक में राष्ट्रीय एवं राज्य सरोगेसी बोर्ड गठित करने की बात कही गई है, इसके अतिरिक्त सरोगेसी के नियमन के लिए अधिकारियों के नियुक्ति की जाएगी ।

उद्देश्य-

  • यह विधेयक लाने का उद्देश्य भारतीय महिलाओं को उत्पीड़न से बचाना है ।
  • इस बिल के माध्यम से सरोगेट जननी तथा उससे उत्पन्न बच्चे के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी ।

विधेयक से संबंधित मुख्य तथ्य-

  • यह विधेयक केवल उन्हीं जोड़ों को सरोगेसी की अनुमति देगा जो बच्चा नहीं जन(उत्पन्न) सकते ।
  • विधेयक के मुताबिक सरोगेसी का लाभ उठाने के इच्छुक व्यक्तियों को भारतीय होना होगा और उनकी शादी के कम से कम पांच साल पूरे हो चुके हो, इसके अलावा जोड़े में से किसी एक को यह साबित करना होगा कि वह बच्चा (जनने) पैदा करने की स्थिति में नहीं हैं ।
  • सरोगेसी के लिए बनाए जा रहे प्रावधानों का उल्लंघन करने पर बिल में कठोर सजा का भी प्रावधान किया गया है ।
  • इस बिल में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड तथा राज्य सरोगेसी बोर्ड की स्थापना के लिए प्रावधान है ।
  • इस बिल के अनुसार समलैंगिक तथा एकल अभिभावकों को सरोगेसी की अनुमति नहीं होगी तथा जिस दंपत्ति के पहले से बच्चे हैं वे भी सरोगेसी का उपयोग नही कर सकते हैं ।
  • इस बिल के अनुसार कोई महिला जीवन में केवल एक बार ही सरोगेट कर सकती है, उसकी उम्र 25 से 35 के बीच होनी चाहिए ।
  • सरोगेसी से उत्पन्न बच्चे की कस्टडी प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट (अथवा इससे ऊपर का अधिकार) द्वारा पारित की जायेगी ।

सरोगेसी-

  • सरोगेसी का मतलब है किसी और की कोख से अपने बच्चे को जन्म देना, अगर कोई पति-पत्नी बच्चे को जन्म
  • नहीं दे पा रहे हैं, तो किसी अन्य महिला की कोख को किराए पर लेकर उसके जरिए बच्चे को जन्म देना सरोगेसी कही जाती है, जिस महिला की कोख को किराए पर लिया जाता है, उसे सरोगेट मदर कहा जाता है ।

स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ संबन्धित संस्था की मुख्य वेबसाइट एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, जनसत्ता इत्यादि ) |

नोट:- इस जानकारी का उपयोग केवल शिक्षण कार्य एवं जानकारी के लिए किया जा रहा हैं |

आगे भाग -2 में जारी...............

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