सरोगेसी बिल-2018
चर्चा का कारण-
- भारत में सरोगेसी से उभरने वाली समस्याओं से निपटने के लिए सरोगेसी (नियामक) विधेयक लोकसभा में लाया गया जो 19 दिसंबर 2018 को पारित हो गया हैं ।
मुख्य बिन्दु-
सजा का प्रावधान-
- सरोगेसी बिल के मुताबिक इसके नियमों को काफी कठोर बना दिया गया है, अगर सरोगेसी के ये प्रावधान तोड़े गए तो इसके इच्छुक दंपती और सरोगेट मां को क्रमशः कम से कम 5 साल और 10 साल तक की सजा हो सकती है ।
- इसके अलावा 5 लाख तक और 10 लाख का जुर्माना भी लगाया जा सकता है ।
- अगर कोई मेडिकल प्रैक्टिशनर इसके नियमों को तोड़ता पाया गया तो उसे कम से कम 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना देना पड़ सकता है ।
सरकार को क्यों लाना पड़ा ये बिल?
- पिछले कुछ साल से भारत को ‘सरोगेसी हब’ कहा जाने लगा था, क्योंकि यहां कम खर्च में किराए की कोख मिल जाती थी।
- इसमें ग्रामीण (रूरल) और जंजातीय (ट्राइबल) महिलाओं का खास तौर पर शोषण हो रहा था।
- सरोगेसी से ज्यादातर अमीर लोग ही संतान सुख हासिल कर रहे हैं।
- एक अनुमान के मुताबिक, अमीर लोग आईवीएफ सेंटरों को 20 से 50 लाख रुपए तक देते हैं। लेकिन किराए पर कोख देने वाली महिलाओं को 40 से 50 हजार रुपए मिलते हैं।
- भारत में सरोगेसी सबसे सस्ती पड़ती है। अनुमान है कि भारत में करीब 2 हजार सरोगेसी क्लिनिक चल रहे हैं।
- यूएस, ब्रिटेन, नेपाल, थाईलैंड जैसे कई देश सरोगेसी को गैरकानूनी करार दे चुके हैं।
किन्हें मिलेगा इस बिल से फायदा?
- सिर्फ वे कपल्स सरोगेसी करा पाएंगे जो किन्हीं कारणों से माता-पिता नहीं बन सकते।
- ऐसे कपल्स जिन्हें शादी के पांच साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ हो।
- सरोगेट मदर का करीबी रिश्तेदार होना जरूरी है। वह एक ही बार सरोगेट मदर बन सकती है।
- सरोगेट मदर और उससे संतान चाह रहे कपल को सक्षम अधिकारी से एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट लेना होगा।
सेलिब्रिटीज ने लिया सरोगेसी का सहारा-
- आमिर खान, शाहरुख खान, तुषार कपूर, करन जौहर, सनी लियोनी। इनमें से आमिर, शाहरुख के पहले से बच्चे थे।
- तुषार कपूर और करन जौहर सरोगेट मदर के जरिए सिंगल पैरेंट बने हैं।
सरोगेसी पर सुप्रीम कोर्ट
- 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने भारत को सरोगेसी टूरिज्म के लिये पसंदीदा जगह बताते हुए इस पर चिंता जताई थी।
- तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को व्यावसायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने की सलाह देते हुए मानव भ्रूण के आयात की अनुमति देने संबंधी नीति की दोबारा जाँच करने का निर्देश दिया था।
- गौरतलब है कि 2013 में केंद्र ने एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें विदेशी दंपतियों के लिये कृत्रिम प्रजनन के ज़रिये मानव भ्रूणों के आयात को मंज़ूरी दी गई थी।
- तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरोगेसी से संबंधित कई मुद्दे किसी कानून के तहत नहीं आते और सरकार को समग्र दृष्टिकोण के साथ एक कानून लाना होगा।
भारत और सरोगेसी-
- फिलहाल भारत में सरोगेसी को नियंत्रित करने के लिये कोई कानून नहीं है और कॉमर्शियल सरोगेसी को तर्कसंगत माना जाता है।
- किसी कानून के न होने की वज़ह से ही Indian Council for Medical Research (ICMR) ने भारत में ART क्लीनिकों के प्रमाणन, निरीक्षण और नियंत्रण के लिये 2005 में दिशा-निर्देश जारी किये थे।
- लेकिन इनके उल्लंघन और बड़े पैमाने पर सरोगेट मदर्स के शोषण और जबरन वसूली के मामलों के कारण इसके लिये कानून की ज़रूरत महसूस की गई।
स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ संबन्धित संस्था की मुख्य वेबसाइट एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, जनसत्ता इत्यादि ) |
नोट:- इस जानकारी का उपयोग केवल शिक्षण कार्य एवं जानकारी के लिए किया जा रहा हैं |