आदि महोत्‍सव-2018

‘आदि महोत्‍सव’ -2018 का आयोजन

चर्चा का कारण-

  • जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड जनजातीय कला, संस्‍कृति, व्यंजन और  व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए राष्‍ट्रीय जनजातीय पर्व ‘आदि महोत्सव’ का दिल्ली में आयोजन किया जाएगा।

मुख्य बिन्दु-

  • इस महोत्‍सव में जनजातीय कला एवं शिल्‍प, औषधियों, विभिन्‍न प्रकार के व्‍यंजनों की प्रदर्शनी एवं बिक्री और जनजातीय लोककला का प्रदर्शन होगा।
  • इस आयोजन में देश के 23 राज्‍यों से जनजातीय कलाकार, शेफ, नर्तक/संगीतकार भाग लेंगे और अपनी समृद्ध पारंपरिक संस्‍कृति की झलक दिखाएंगे।
  • इस महोत्‍सव का विषय 'आदिवासी संस्कृति, कला, व्यंजन और व्यापार की भावना का उत्सव' है।
  • इस उत्‍सव में 100 स्‍टॉल लगाए जाएंगे, जिन पर जनजातीय हस्‍तशिल्‍प, कला, चित्रकारी, कपड़े, गहने सहित कई और वस्‍तुओं की प्रदर्शनी और बिक्री होगी।
  • इस उत्‍सव में अलग-अलग राज्‍यों से 200 से अधिक जनजातीय कलाकार भाग लेते हुए एक छोटे भारत की झलक दिखलाएंगे।
  • आदिवासी जनजीवन आदिम सच्‍चाई, शाश्‍वत मूल्‍यों और प्राकृतिक सहजता से निर्देशित होता है।
  • इस महोत्‍सव में 23 राज्‍यों से 600 शिल्‍पकार, 20 से अधिक राज्‍यों से 80 शेफ और 200 से अधिक कलाकारों के 14 नृत्‍य दल भाग लेंगे।
  • इस महोत्‍सव की खासियत महुआ से शराब, ताड़ से ताड़ी और इमली की चटनी बनते दिखना, लाह से चुड़ियों का निर्माण, चार विभिन्न पेंटिंग स्कूलों वर्ली, पिथौरा, गोंड एवं सौरा की लाइव पेंटिंग, जनजातीय कपड़ों के फैशन शो, जनजातीय व्यंजनों को बनते दिखना और विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय सामानों की बिक्री है।

स्रोत:- भारत सरकार की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और राज्य सभा टीवी, डीडी न्यूज़ संबन्धित संस्था की मुख्य वेबसाइट एवं अन्य निजी समाचार पत्र ( द हिन्दू, टाइम्स ऑफ इंडिया,मिंट, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, जनसत्ता इत्यादि ) |

नोट:- इस जानकारी का उपयोग केवल शिक्षण कार्य एवं जानकारी के लिए किया जा रहा हैं |

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