भारत में हिंदू धर्म भाग 2

भारत में हिंदू धर्म भाग 2

  • अथर्ववेद में जादू तथा औषधियों के विषय पर प्रकाश डाला गया है।
  • सभी वेदों से संबंधित कुछ टिकाऊ की भी रचना की गई है जैसे उदाहरण स्वरूप ब्राह्मण साहित्य वेदों पर लिखी गई एक टीका ही है ।
  • अरण्यक और उपनिषद वेदों से संबंधित अन्य साहित्य हैं ।
  • जहां अरण्यक में रहस्यवाद से संबंधित विचार शामिल है वही उपनिषदों में मनुष्य और उसके वास्तविक स्वरूप के संबंध में चिंतन किया गया है ।
  • प्राचीन इतिहास के साधन के रूप में वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का स्थान आता है ।
  • यजुर्वेद तथा समृद्ध में किसी भी विशिष्ट ऐतिहासिक घटना का वर्णन नहीं मिलता है ।
  • सबसे अंतिम वेद अथर्ववेद है ।
  • वहीं पुराणों में मत्स्य पुराण सबसे प्राचीन एवं प्रमाणिक है ।
  • शतपथ ब्राह्मण में स्त्री को पुरुष का अर्धांगिनी कहा गया है वहीं स्त्री की सबसे गिरी हुई स्थिति में मैत्रीयनी संहिता से मिलती है जिसमें जुड़ा और शराब की भांति स्त्री को पुरुष का तीसरा मुख्य दोष बताया गया है ।
  • यह धार्मिक यज्ञ तथा बालियों मुक्ताकाश में की जाती थी किंतु बाद में पूजा या देवी प्रतिमाओं की आराधना आरंभ हो गई ।

ऋग्वेद के बारे में-

  • रिचा हूं कि क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है ।
  • इसमें 10 मंडल 1028 सूक्त एवं 10462 विचार शामिल है ।
  • सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है ।
  • इसके नवी मंडल में सोम देवता का उल्लेख किया गया है ।
  • ऋग्वेद के दसवें मंडल में वर्णित पुरुष सूक्त है जिसमें चार वर्णों में समाज की कल्पना की गई है यह धर्मसूत्र चार प्रमुख जातियों की स्थितियों व्यवसाय एवं दायित्वों कर्तव्य तथा विशेषधिकारियों में स्पष्ट भी भेद करता है । इसके अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय वैसे तथा सूत्र हैं जिसमें पुरुष ब्रह्मा के क्रम मुख भुजाओं जाँघ और चरणों से उत्पन्न हुए बताया गया है । 

स्रोत विभिन्न पाठ्य पुस्तक

आगे क्रमशः जारी भाग 3 में................

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