भारत में हिंदू धर्म भाग 3

भारत में हिंदू धर्म भाग 3

वैदिक काल में चार वेद बताए गए हैं ।

ऋग्वेद के बारे में 

  • कुछ बिंदु भाग 2 में दिए गए हैं।

यजुर्वेद के बारे में-

  • सस्वर पाठ के लिए मंत्र तथा बली के समय अनुपालन के लिए नियमों का संकलन यजुर्वेद में किया गया है ।
  • यजुर्वेद मैं यज्ञों के नियमों एवं विधि विधान ओं का संकलन गद्य और पद्य दोनों रूपों में मिलता है ।

साम वेद के बारे में-

  • इसमें मुक्ता यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों का संकलन किया गया है ।
  • इसे भारतीय संगीत का जनक भी कहा जाता है ।

अथर्ववेद के बारे में-

  • अथर्ववेद में कुछ मंत्र ऋग्वेद मंत्र से भी प्राचीन माने जाते हैं ।
  • अथर्ववेद कन्याओं की जन्म की निंदा करता है ।
  • इसमें सामान्य मनुष्य के विचारों तथा अंधविश्वासों का विवरण मिलता है ।
  • पृथ्वी सूक्त अथर्ववेद का प्रतिनिधि सूक्त माना जाता है इसमें मानव जीवन के सभी पक्षों गृह निर्माण किसी की उन्नति व्यापारिक मार्गों का गण खोज रोग निवारण विवाह तथा गीतों राज भक्ति राजा का चुनाव मातृभूमि माता दी का विवरण दिया गया है ।
  • अथर्ववेद में परीक्षित को गुरुओं का राजा कहा गया है तथा कुरु देश की समृद्धि का अच्छा चित्रण मिलता है ।
  • अथर्व वेद में सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है ।
  • वेदों को भली-भांति समझने के लिए छवि दंगों की रचना हुई है यह शिक्षा ज्योतिषी कल्प व्याकरण निरुक्त तथा छंद के रूप में हैं ।

स्रोत विभिन्न पाठ्यपुस्तक

आगे क्रम सा जारी भाग 4 में...................

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