भारत में हिंदू धर्म भाग 5 (हिंदू धर्म के अंतर्गत पंथ)

भारत में हिंदू धर्म भारत 5

हिंदू धर्म के अंतर्गत पंथ

प्राचीन काल में वेदों के द्वारा हिंदू धर्म आगे बढ़ा एवं मध्य काला कहते हैं हिंदू धर्म भक्ति आंदोलन में परिवर्तित होकर आंदोलित हुआ एवं आगे बढ़ा ।

संतो ने संस्कृत के मूल ग्रंथों को स्थानीय भाषाओं में अनुवादित किया तथा देवताओं के प्रति भक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया ।

हिंदू धर्म के अंतर्गत 4 पंथ माने गए हैं जो निम्नलिखित हैं-

  1.  वैष्णोववाद-  इस धर्म के अनुयाई विष्णु भगवान को सर्वोच्च भगवान मानते हैं इस परंपरा की उत्पत्तिि ईसा पूर्व पहली शताब्दी में भगवावाद के रूप में हुई थी इसे कृष्ण वाद भी कहा जाता हैं । वैष्णव परंपरा के कई समुदाय एवं उपशाखाए हैं ।
  2. शैववाद - इसमें भगवान शिव को सर्वोच्च भगवान माना जाता हैं, शैववाद की उत्पत्ति वैष्णो वाद से पहले ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में वैदिक देवता केेेे रूप में    मानी जाती   है ।
  3. शक्तिवाद - इसमें स्त्री या देवी को सर्वोच्च शक्ति माना जाता है इसे तंत्र की विभिन्न उप परंपराओं के लिए जाना जाता है ।
  4. स्मार्तवाद - यह पुराणों की शिक्षाओं पर आधारित है , यह पांच देवताओं की घर में ही पूजा पर विश्वास करते हैं और सभी को समान माना जाता है वे देवता निम्नलिखित हैं- शिव, शक्ति , गणेश विष्णु और सूर्य । स्मार्त वाद में ब्राह्मण की तो अवधारणाओं को स्वीकार किया जाता है- सगुण ब्राह्मण यानी गुण युक्त ब्राह्मण और निर्गुण ब्राह्मण यानी गुणों से रहित ब्राह्मण माना गया है ।

इन चार प्रमुख परंपराओं के अंतर्गत अनेक पंथ या संप्रदाय है , यह संप्रदाय स्वायत्त  प्रारथाओ और मठ केंद्रों से युक्त शिक्षण परंपराएं हैं ।

स्रोत विभिन्न पाठ्यपुस्तक

आगे क्रमशः जारी भाग 6..................

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