भारत में हिंदू धर्म भाग 9 (लिंगायत संप्रदाय)

भारत में हिंदू धर्म भाग 9

शैव धर्म का एक अंग लिंगायत संप्रदाय

  • इससे वीर शैव संप्रदाय के रूप में भी जाना जाता है ।
  • यह परंपरा का भेद है जो कि एक ईस्वर में विश्वास करता है ।
  • शून्य संपादने लिंगायत संप्रदाय का मुख्य धार्मिक ग्रंथ है ।
  • इनकी उपासना पद्धति लिंग के रूप में भगवान शिव पर केंद्रित होती है ।
  • लिंगायत संप्रदाय वेदों की सत्ता और जाति व्यवस्था को पूरी तरह से नकारता हैं ।
  • इस परंपरा की स्थापना 12 वीं सदी में बसवन्ना द्वारा की गई थी ।
  • बसवा पुराण में लिंगायत संप्रदाय के प्रवर्तक वल्लभ प्रभु तथा उनके शिष्य बसवा को बताया गया है ।
  • या संप्रदाय अधिकतर दक्षिण भारत में प्रचलित है ।

अघोरी

  • यह शिव के भैरव अवतार के भक्त हैं ।
  • ऐसे साधु जो श्मशान भूमियों में साधना करके एवं अपने जीवन से इंद्रिय सुख क्रोध लोभ, मोह, भय , और घ्रणा जैसे बंधनों को समाप्त कर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं ।
  • यह अतिशय तामसिक अनुष्ठान प्रथाओं में लगे रहते हैं ।

नाथ संप्रदाय

  • 10 वीं शताब्दी में मत्येन्द्रनाथ ने नाथ संप्रदाय की स्थापना की थी ।
  • इस संप्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार बाबा गोरखनाथ के समय में हुआ था ।
  • आदित्य योगी नाथ भी इसी संप्रदाय से संबंधित हैं ।

शैव धर्म से संबंधित अन्य तथ्य :-

  • दक्षिण भारत में शैव धर्म चालुक्य , राष्ट्रकूट पल्लो एवं चोलो केे समय अधिक लोकप्रिय हुआ था ।
  • एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट ने करवाया था ।
  • चोल शासक राजा राज प्रथम नी तंजौर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया था जिसे बृहदेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है ।
  • कुषाण शासकों की मुद्राओं पर शिवम नंदी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है ।
  • शिव से संबंधित प्रसिद्ध कैलाश मेला आगरा में लगता है ।

स्रोत विभिन्न ने पाठ्यपुस्तक

भारत में हिंदू धर्म इसी क्रम में आगे भाग 10 में जारी...........

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