भारत में हिंदू धर्म भाग 11 (ब्रह्म समाज या ब्रह्म आंदोलन)

भारत में हिंदू धर्म भाग 11

हिंदू धर्म की कुरीतियों को खत्म करने के लिए हुए प्रमुख आंदोलन

ब्रह्म समाज या ब्रह्म आंदोलन

प्रमुख तथ्य :-

  • ब्रह्म समाज की स्थापना राजा राममोहन राय द्वारा हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों के विरोध में की गई थी ।
  • इन मुद्दों के समाधान करने तथा वेदांत की सत्य का साक्षात्कार करने की इच्छा से उन्होंने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की थी ।
  • राजा राममोहन राय न्यू मूर्ति पूजन को अस्वीकार किया है ।
  • राजा राममोहन राय जी ने सती प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई जिसका एक लंबे अभियान के पश्चात 1829 में तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिक द्वारा इसे गैरकानूनी घोषित करके रोक लगा दी गई ।
  • राजा राममोहन राय जी जनसाधारण को शिक्षा से जोड़ने के लिए दो विद्यालयों की स्थापना की थी ।
  • राजा राममोहन राय जी की मृत्यु के पश्चात इस मिशन को 1843 में देवेंद्र नाथ टैगोर के द्वारा आगे बढ़ाया गया ।
  • देवेंद्र नाथ टैगोर एक प्रखर लेखक थे जिन्होंने निर्धन लोगों का धर्म परिवर्तन करने के लिए ब्रिटेन तथा ईसाई मिशनरियों की आलोचना की उन्होंने लोगों को धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाने से रोकने के लिए हिंदू धर्म में बड़े स्तर पर परिवर्तन लाने का अग्रह किया ।
  • केशव चंद्र सेन ने बाल विवाह बहु विवाह तथा जाति प्रथा के विरुद्ध भी आवाज उठाना आरंभ किया एवं उनके साथ कुछ अनुयाई उग्र सुधारवादी थे उन्होंने आज समाज से अलग होकर भारतीय ब्रह्म समाज की स्थापना की ।
  • भारतीय ब्रह्म समाज की स्थापना के पश्चात शीघ्र ही पुरानी ब्रह्म समाज में फूट पड़ गई तथा साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना हुई एवं इन सभी फूट एवं बिखराव के कारण वे आंदोलन को जारी नहीं रख सके ।

स्रोत विभिन्न ने पाठ्यपुस्तक

भारत में हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों को मिटाने के लिए हुए प्रमुख आंदोलन इसी क्रम में आगे भाग 12 में जारी.............

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